बुधवार को संसद में यह विधेयक पेश किया गया. इसका मकसद संपत्तियों के प्रबंधन को बेहतर बनाना और वक्फ कानून की कमजोरियों को दूर करना है. लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह वक्फ बोर्ड की आजादी खत्म करने की कोशिश है.
केवाईसी का काम तीसरे पक्ष से करवाना भी एक मसला है, क्योंकि वे बिना सोचे-समझे ग्राहकों से दस्तावेज़ मांगने के संदेशों की बमबारी करने के लिए जाने जाते हैं.
ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठक के बाद उन्हें काम पर वापस जाने के लिए राजी कर लिया गया और आश्वासन दिया गया कि उनकी चिंताओं का सम्मान किया जाएगा.
ट्रंप जबकि गोली दागने की धमकी दे रहे हैं, अपनी पीठ खुद ठोकने में व्यस्त भारतीय सत्ता-तंत्र को सुर्खियां बनवाने के मोह से छुड़ाने के लिए ऐसी ही धमकी की जरूरत थी.