रिटायर्ड जस्टिस दीपक वर्मा, जिन्होंने एक विशेषज्ञ गवाह के तौर पर गवाही दी, ने कहा कि यह 'अपरिहार्य' था कि मोदी को हिरासत में लंबे समय तक पूछताछ का सामना करना पड़ेगा और उन्हें हिरासत में यातना दिए जाने का भी जोखिम था.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.