दो वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के उस निर्देश को नहीं माना, जिसमें उन्हें TVK सरकार के ख़िलाफ़ 14 अगस्त को होने वाले विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था.
यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी पीएम मोदी की भाषा से प्रभावित थे. ज्यादा संभावना है कि वे बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स की ओर से सरकार के आलोचकों के खिलाफ लगातार की जाने वाली गाली-गलौज से प्रभावित थे.
मोदी सरकार माओवादी हिंसा को कुचलने में तो कामयाब रही है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है. सरेंडर करने वाले कई माओवादी गुरिल्लाओं और हिंसा के शिकार लोगों का अब पुनर्वास किया जाना ज़रूरी है.
दो वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी के उस निर्देश को नहीं माना, जिसमें उन्हें TVK सरकार के ख़िलाफ़ 14 अगस्त को होने वाले विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था.
चालीस साल पहले, इसी सप्ताह खालिस्तान कमांडो फोर्स के हत्यारे जनरल वैद्य को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारे इस रिटायर्ड सेनाध्यक्ष की सुरक्षा की सिर्फ इतनी फिक्र की गई थी कि उनके लिए पुलिस का सिर्फ एक गनमैन तैनात किया गया था.