उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे कई मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने शपथ लेते समय राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद संभाला. इनमें मायावती से लेकर राजनाथ सिंह तक शामिल हैं.
अपने आखिरी टर्म में एक लेम-डक प्रेसिडेंट के पास बहुत ज़्यादा एग्जीक्यूटिव पावर्स भी होती हैं, जिसमें ट्रीटी साइन करना, युद्ध शुरू करना या उनसे पीछे हटना शामिल है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऐसे कई मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने शपथ लेते समय राज्य विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं होने के बावजूद मुख्यमंत्री पद संभाला. इनमें मायावती से लेकर राजनाथ सिंह तक शामिल हैं.
नेतन्याहू की जीत इसलिए मानी जाएगी क्योंकि उन्हें हराया नहीं जा सका है. हमास की ‘कृपा’ से उन्होंने इजरायल को पूरी तरह बदल दिया है. अब वहां अरब नागरिकों को अलग करके ही कोई गठबंधन सत्ता में आ सकता है.