बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था कुछ समय के लिए औपचारिक धर्मनिरपेक्षता के दौर में रहने के बाद बंटवारे के पहले वाली हकीकत के दौर की ओर लौट रही है. भारत को इसे समझते हुए रिश्ते तय करने चाहिए.
बांग्लादेश की राजनीतिक व्यवस्था कुछ समय के लिए औपचारिक धर्मनिरपेक्षता के दौर में रहने के बाद बंटवारे के पहले वाली हकीकत के दौर की ओर लौट रही है. भारत को इसे समझते हुए रिश्ते तय करने चाहिए.
दून बार अकादमी के संस्थापक कुलदीप सिंह ने कहा, ‘आमतौर पर सेना में कोई ऐसा व्यक्ति होता था जो घर बना सकता था, कार खरीद सकता था, परिवार का खर्च उठा सकता था. आज, बारटेंडर को वह दर्जा प्राप्त है.
दिल्ली की मुख्यमंत्री के तौर पर एक साल पूरा होने के बाद गुप्ता कहती हैं, 'यह वादों की नहीं, बल्कि नतीजों की सरकार है.' कुछ चुनावी वादे पूरे हो गए हैं, कुछ योजनाएं अभी लागू होनी बाकी हैं.
हर देश अब यह खेल खेलना सीख रहा है. कुछ देश नए सहयोगी ढूंढ रहे हैं या उन देशों की अहमियत समझ रहे हैं, जिनमें पहले उनकी बहुत कम दिलचस्पी थी. इसका सबसे साफ उदाहरण भारत और यूरोप हैं.