विशेषज्ञों के मुताबिक, रूसी कच्चा तेल बाल्टिक बंदरगाहों से लेकर गुजरात के तट तक करीब 7,000 नॉटिकल मील का सफर करता है—रास्ते में शिप-टू-शिप ट्रांसफर करके और कई बार कीमत की तय सीमा से बचने के तरीके अपनाकर.
यह सोच कि किसी भी पहाड़ तक पहुंच अच्छी चीज़ है, और कोई भी चोटी पहुंच से बाहर नहीं होनी चाहिए—पहाड़ों को ऐसी चीज़ में बदल देती है जिसका सामना करने के बजाय, उसे बस इस्तेमाल किया जाए.
कार्यकर्ता रुद्राणी छेत्री ने कहा, ‘किन्नर और हिजड़ा समुदाय आमतौर पर गरिमा गृह नहीं आते. अगर यह कानून लागू हुआ, तो जो लोग हमारे पास आते हैं, उनमें से ज्यादातर की हम मदद नहीं कर पाएंगे.’
अशोक मित्तल पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं. पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद रूस, लातविया, स्लोवेनिया, ग्रीस और स्पेन का दौरा करने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का वे हिस्सा थे.
सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.