अपने सहयोगी दलों से विजय को बहुमत दिलाकर एम. के. स्टालिन ने खुद को जनादेश का सम्मान करने वाला नेता दिखाया है. वह शायद विजय को असफल होते देखना ज्यादा पसंद करेंगे.
2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की हार के कुछ ही महीनों बाद शुरू किए गए ASAP को युवाओं और कैंपस में पार्टी की घटती पकड़ को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है.
इस चुनाव ने भाजपा और सेक्युलर पार्टियों के बीच साफ हिंदू-मुस्लिम बंटवारे को और मजबूत कर दिया है. भाजपा के विरोधी अब मुस्लिम पार्टियों जैसे दिखने लगे हैं. हालांकि, उनके नेता हिंदू हैं.