सरकार छात्रों की ज्यादातर बड़ी मांगों पर राजी हो गई है, लेकिन CBI जांच की एक मांग को नहीं माना गया है. छात्रों का कहना है कि सभी मांगों पर सहमति बनने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
मनमोहन सिंह सरकार के दौरान हुई सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में भी जाति का सवाल खुला रखा गया था, ड्रॉप-डाउन मेन्यू नहीं दिया गया था. इस कवायद में जाति, उप-जाति और गोत्र के 46.7 लाख नाम सामने आए थे, जिससे उनका वर्गीकरण करना लगभग असंभव हो गया था.
मोदी सरकार माओवादी हिंसा को कुचलने में तो कामयाब रही है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है. सरेंडर करने वाले कई माओवादी गुरिल्लाओं और हिंसा के शिकार लोगों का अब पुनर्वास किया जाना ज़रूरी है.
अगले साल UP में चुनाव होने हैं, ऐसे में दो मुस्लिम नेताओं को टीम में शामिल किए जाने पर ध्यान गया है. मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि बासित को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है.
चालीस साल पहले, इसी सप्ताह खालिस्तान कमांडो फोर्स के हत्यारे जनरल वैद्य को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारे इस रिटायर्ड सेनाध्यक्ष की सुरक्षा की सिर्फ इतनी फिक्र की गई थी कि उनके लिए पुलिस का सिर्फ एक गनमैन तैनात किया गया था.