इंदौर में कार्यक्रम तक जाने वाली सड़कें लोगों से भरी थीं और एयरपोर्ट से कार्यक्रम स्थल तक के रास्ते पर बैनर और पोस्टर लगे थे. लाउडस्पीकर पर गांधी को ‘युवाओं का मसीहा’ बताया जा रहा था.
स्वैच्छिक बदलाव से सभी कंपनियों के लिए बराबर की प्रतिस्पर्धा की स्थिति नहीं बन पाई थी. फूड पैकेट पर चेतावनी वाले लेबल अब एक समान व्यवस्था उपलब्ध करा सकते हैं.
RJ प्रतीक भारद्वाज ने कूड़े से भरी गोमती नदी को देखने के बाद Go For Gomti शुरू किया. शुरुआत में उन्हें ‘सफाई कर्मचारी’ कहकर मज़ाक उड़ाया गया, फिर धीरे-धीरे करीब 8,000 वालंटियरों का नेटवर्क बन गया, जिसमें बुजुर्गों से लेकर युवा तक शामिल हैं.
2015 के बाद पहली बार, NSUI चार सदस्यों वाले DUSU सेंट्रल पैनल में एक भी पद नहीं जीत पाई है, जिससे कन्हैया कुमार के नेतृत्व में संगठन के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं.
भारत खुद के बनाए जाल में फंस गया है. भले ही BJP को लोगों की असुरक्षा की भावना का फ़ायदा उठाना सुविधाजनक लगे, लेकिन इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश को बढ़त मिल जाती है.