राहुल गांधी और सैम पित्रोदा ने झारखंड के प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस के चार मंत्री सोरेन सरकार में बने हुए हैं—सत्ता में रहते हुए विपक्ष करने की अपनी सीमाएं हैं.
भागवत दूर से नजर रखे हुए थे और मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को लेकर चिंतित थे. सबसे पहला काम तो उन्होंने यह किया कि Gen-Z के आंदोलनकारियों को राष्ट्र-विरोधी बताने वाली आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया.