अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है
दो नौजवानों—अली मोहम्मद भट और मोहम्मद मकबूल भट—को ‘मुखबिर’ होने के आरोप में मार दिया गया. उनकी बिना निशान वाली कब्रों पर कोई रस्में अदा नहीं की गईं. न ही कोई शहादत मार्च निकला और न ही कोई मौखिक इतिहास रचा गया.
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के शुक्रवार को लोकसभा में 230 के मुकाबले 298 वोटों से खारिज हो जाने के बाद, कांग्रेस सांसद ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है