इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के प्लांट में 34 रुपये रोज़ाना की नौकरी के लिए सुमित्रा की लड़ाई 1989 में शुरू हुई थी. 63 साल की उम्र में उनका कहना है कि उन्हें मिला 12 लाख रुपये का मुआवज़ा उस नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता जो उन्होंने उठाया है.
स्वैच्छिक बदलाव से सभी कंपनियों के लिए बराबर की प्रतिस्पर्धा की स्थिति नहीं बन पाई थी. फूड पैकेट पर चेतावनी वाले लेबल अब एक समान व्यवस्था उपलब्ध करा सकते हैं.
RJ प्रतीक भारद्वाज ने कूड़े से भरी गोमती नदी को देखने के बाद Go For Gomti शुरू किया. शुरुआत में उन्हें ‘सफाई कर्मचारी’ कहकर मज़ाक उड़ाया गया, फिर धीरे-धीरे करीब 8,000 वालंटियरों का नेटवर्क बन गया, जिसमें बुजुर्गों से लेकर युवा तक शामिल हैं.
ED का अनुमान CBI की उन जांच-पड़ताल से मेल खाता है जो जनवरी में दाखिल चार्जशीट में बताई गई थीं; इसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि 250 करोड़ रुपये का भारी-भरकम वित्तीय और सिंथेटिक घी का घोटाला हुआ था.
भारत खुद के बनाए जाल में फंस गया है. भले ही BJP को लोगों की असुरक्षा की भावना का फ़ायदा उठाना सुविधाजनक लगे, लेकिन इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश को बढ़त मिल जाती है.