रहमान की यह यात्रा, पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के सत्ता से हटने के बाद किसी बांग्लादेशी विदेश मंत्री की नई दिल्ली की पहली यात्रा होगी. उथल-पुथल भरे दौर के बाद, भारत और बांग्लादेश अपने संबंधों को स्थिर करने की दिशा में काम कर रहे हैं.
थाईलैंड में अंपायरिंग से लेकर BCCI की मंज़ूरी और फिर ICC पैनल तक—मुज़फ़्फ़रनगर के 61 वर्षीय इस शख़्स के लिए यह एक लंबा और बेहद कामयाब सफ़र रहा है. और उनका यह सफ़र अभी ख़त्म नहीं हुआ है.
एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.