79 साल की उम्र में, भारत के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या रिश्तों और विकल्पों के बढ़ते दायरे को बड़े क्षेत्रीय प्रभाव और मज़बूत वैश्विक आवाज़ में बदला जा सकता है.
पसीने से तर, बिखरे बालों और खून से सने राहुल गांधी का युवा आबादी के साथ खड़े होना उस ‘हीरो की कहानी’ जैसा है, जिसका कांग्रेस नेता एक दशक से ज्यादा समय से इंतज़ार कर रहे थे.
मोदी सरकार माओवादी हिंसा को कुचलने में तो कामयाब रही है, लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है. सरेंडर करने वाले कई माओवादी गुरिल्लाओं और हिंसा के शिकार लोगों का अब पुनर्वास किया जाना ज़रूरी है.
कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के इस कदम से सत्ताधारी पार्टी और RSS जैसे संगठनों के बीच बढ़ता टकराव और तेज़ हो गया है; राज्य में RSS की अच्छी-खासी मौजूदगी है.
भागवत दूर से नजर रखे हुए थे और मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को लेकर चिंतित थे. सबसे पहला काम तो उन्होंने यह किया कि Gen-Z के आंदोलनकारियों को राष्ट्र-विरोधी बताने वाली आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया.