अगर शेख हसीना की घर वापसी होती है, तो 2024 के छात्र आंदोलन के बाद यह बांग्लादेश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना होगी. इसी आंदोलन ने उनकी सरकार गिरा दी थी और उन्हें देश छोड़ना पड़ा था.
युवाओं ने कुलीन तबकों की खुद की ओढ़ी उस चुप्पी को तोड़ दिया, जो उन्हें मोदी सरकार की आलोचना में एक भी शब्द खुलकर बोलने से रोकती थी, और कुछ कहना भी हो तो दाएं-बाएं, आगे-पीछे झांकने के बाद दबी आवाज में.