गठबंधन और समझौते पर आधारित यही व्यावहारिक मध्यमार्गी राजनीति. और कठोर वैचारिक शुद्धता की जगह व्यापक समर्थन को प्राथमिकता देने की सोच. उन्हें इस मुकाम तक लेकर आई.
TMC को मिली करारी हार के बाद पॉलिटिकल कंसल्टेंसी एक बार फिर चर्चा में आ गई है. बता दें कि TMC के पश्चिम बंगाल चुनाव अभियान की कमान I-PAC के हाथों में थी. आइए जानते हैं कि चुनावी रणनीतिकारों ने कैसे '1,500 करोड़ रुपये' का यह उद्योग खड़ा किया.
तेल का झटका, मॉनसून फेल होने का डर, व्यापक बेरोजगारी, और आसन्न महंगाई से उपजे संकट इंदिरा युग में भी थे और आज भी हैं; इंदिरा गांधी ने जो आत्मघाती कदम उठाया था वह आज के लिए भी एक सबक है.