अगले साल चुनावी दौर शुरू होने वाला है. कांग्रेस नेता की योजनाओं और नीतियों की घोषणा करने की जल्दबाजी और उनका बेहद व्यस्त कार्यक्रम अभी तक जनता की अच्छी प्रतिक्रिया में नहीं बदल पाया है.
अपने लेख ‘मनुस्मृति स्त्री-पुरुष दोनों के लिए सख्त है, इसे जलाने से पहले पढ़ तो लीजिए’ में रोहिणी बख्शी इसमें दर्ज कुछ विशेष शर्तों का हवाला देती हैं जबकि इस पूरे ग्रंथ के वास्तविक परिणामों की अनदेखी कर जाती हैं.
‘ईबीपी’ का आइडिया बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन इसके लिए तीन-चार साल पहले से तैयारी करनी चाहिए थी. अब हम चीनी और दूसरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं, जबकि त्योहार सामने हैं. इसके अलावा विदेशी मुद्रा की स्थिति भी खराब है.