50 साल की भारती मुदी ने बांकुरा में 35 आदिवासी लड़कियों को कोचिंग देने में 17 साल बिताए हैं. उन्होंने इन लड़कियों को स्कूल में बने रहने, बंगाल के लिए खेलने और सरकारी नौकरियां पाने में मदद की है.
गेकू में कई महिलाओं के लिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने रोजमर्रा की ज़िंदगी बदल दी है. सुरक्षा बलों की तैनाती के कारण खेतों तक जाना भी असुरक्षित महसूस होने लगा है.
अशोक ताजो ने कहा कि आजीविका योजना के बारे में लोगों को ठीक से नहीं बताया गया. इससे लोगों को शक हुआ कि प्रशासन बांध के लिए सहमति लेने के बदले आर्थिक मदद का इस्तेमाल कर रहा है.
दिल्ली एनसीआर की गेटेड सोसाइटियों में घरेलू कामगारों के दैनिक अनुभव उन लोगों के खिलाफ मौन भेदभाव के व्यापक पैटर्न को दर्शाते हैं जो परिवारों के लिए खाना बनाते हैं, सफाई करते हैं और उनकी देखभाल करते हैं.
कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने कहा कि येत्तिनाहोल जल परियोजना आखिरकार 2027 के अंत तक पूरी होने वाली है। इसका प्रस्ताव 14 साल पहले रखा गया था.
बालियावास से लेकर बादशाहपुर तक, स्थानीय ग्रामीणों से लीज़ पर लिए गए फ्लडलाइट वाले टर्फ मैदान कॉर्पोरेट जगत के लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं—और देर रात की बुकिंग से लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं.
कविता महतो की दौड़ ने उन्हें मशहूर कर दिया. उनके दिन आज भी सुबह 3 बजे गाय का दूध निकालने के साथ शुरू होते हैं, और रात में दरवाजे पर किसी नेता के इंतजार के साथ खत्म होते हैं.