पाकिस्तान के लिए अब समस्या सिर्फ़ यह नहीं है कि उग्रवाद बना हुआ है. बल्कि समस्या यह है कि उग्रवादी उस तरीके के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं, जिससे सरकार उनसे लड़ती है.
ऑपरेशन सिंदूर को भविष्य की जंग की तस्वीर मान लेना एक गंभीर गलती होगी. जानबूझकर सीमित रखे गए किसी अभियान की सफलता से यह पता नहीं चलता कि जंग जीतने के लिए क्या-क्या जरूरी होगा.
मैं पगड़ी पहनने वाला और धर्म का पालन करने वाला सिख हूं. जेल से शरजील इमाम ने जो लंबा इंटरव्यू दिया है, मैं उससे ज़्यादातर बातों पर सहमत नहीं हूं, भले ही वह इंटरव्यू कितना भी गंभीर क्यों न हो.
कानून में यह नहीं बताया गया है कि क्या फेशियल रिकग्निशन मैच को भरोसेमंद जानकारी माना जाएगा. जो अधिकारी इसके आधार पर कार्रवाई करता है, वह एक तरह से अस्पष्ट स्थिति में काम कर रहा होता है.
PM मोदी जितना ज्यादा CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के फैसले को टाल रहे हैं, प्रदर्शनकारियों को उतना ही फायदा हो रहा है. कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ भी ऐसा ही है.
दिल्ली के बैरिकेड्स से लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क तक, ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज़ हो रहे हैं और राजनीतिक दल तथा छात्र संगठन इस मुद्दे पर एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं.
इन नतीजों को विपक्ष के ‘वोट चोरी’ वाले अभियान पर देश का फ़ैसला मानना समझदारी नहीं होगी. हालांकि, ये नतीजे यह ज़रूर बताते हैं कि वोटिंग के फ़ैसले में यह मुद्दा अब भी मुख्य नहीं है.
पब्लिक ऑफिस में अपने 26वें साल में कदम रखते हुए मोदी कई तरह की मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. इस ने 2014 के बाद से मोदी के 3-सूत्रीय एजेंडे पर सबसे ज़्यादा दबाव डाला है.