तमिलनाडु के CM विजय का पॉलिटिकल अप्रोच सोचा-समझा और स्ट्रेटेजिक रहा है. उनकी टकराव में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे व्यवस्था के भीतर रहकर काम करना चाहते हैं.
'आर्थिक देशभक्ति' के नाम पर मोदी ने भारतीयों से जो कुछ करने को कहा, उसमें से ज़्यादातर बातें समझदारी भरी थीं. लेकिन अच्छे समय में कोई भी इस तरह का भाषण नहीं देता. संकट सिर पर मंडरा रहा है.
दूरदराज़ के मित्र देशों का बचाव करने के लिए अपनी संपदा और अपना खून दांव पर लगाने में अमेरिका की बढ़ती हिचक न केवल युद्ध का जोखिम बढ़ाएगी बल्कि उसे अकल्पनीय रूप से ज्यादा विनाशकारी बनाएगी.
भूटान के पढ़े-लिखे युवाओं की सबसे पसंदीदा जगहों में ऑस्ट्रेलिया शामिल हो गया है. विदेश जाने वालों में कई हाई स्किल वाले लोग और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं.
कज़ाकिस्तान या तुर्कमेनिस्तान की तरह, रूस की भूमिका भी महज़ 'ड्रैगन' का पेट भरना है. ऊर्जा की कम कीमतें बीजिंग के लिए फ़ायदेमंद हैं, मॉस्को के लिए नहीं.